बोलो तुम बोलो ज़रा


 

बोलो तुम बोलो ज़रा
बोलो तुम बोलो ज़रा

 



तुमसे तो

दिलकी रिश्ता

कैसे ये मैं भूलूं

सारे व बिगत स्मृति

कैसे जलालूं II

 

जब भी तुम

याद आते

सोचता मैं मिललूं

जीभरके दिलकी बातें

तुम्हे सुनालूं II

 

अब्सोस ये होता काहां

कैसे मैं ढूंडलूं

खोगया धन क्या भला

फिरसे मैं पाऊं II

 

दिलसे बात होता नहीं

दबा क्या डालूं

अनचाहे प्रेम ऐसे

केसे उगालूं II

 

बोलो तुम बोलो ज़रा

क्या फिर मैं करूँ

जिबनकी अनमोल घड़ी

कैसे गबालूं II 

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